तेज प्रताप की दूरी: क्या RJD ने सच में अलग किया या ये सिर्फ राजनीति है?
By Samastipur Sahar News Desk | Date: 23 अगस्त 2025
विषय सूची
- तेज प्रताप और RJD का पृष्ठभूमि
- निष्कासन का कारण
- परिवार और रिश्तों में दरार
- बिहार की राजनीति पर असर
- तेज प्रताप की राजनीतिक रणनीति
- निष्कर्ष
तेज प्रताप और RJD का पृष्ठभूमि
लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक समय RJD के उभरते चेहरों में गिने जाते थे। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्होंने शुरुआत की थी, लेकिन अक्सर उनके बयानों और व्यक्तिगत विवादों ने पार्टी को असहज किया। तेजस्वी यादव के मुकाबले तेज प्रताप को गंभीर नेता के रूप में कभी उतना स्थापित नहीं किया गया।
निष्कासन का कारण
मई 2025 में लालू यादव ने खुद तेज प्रताप को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। कारण बताया गया कि उनका आचरण “पारिवारिक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ” है। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक महिला के साथ तेज प्रताप की तस्वीर वायरल हुई थी जिसने विवाद खड़ा कर दिया। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना और कठोर कदम उठाया।
परिवार और रिश्तों में दरार
सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि परिवार में भी दूरी दिखाई दी। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप को परिवार ने भी “डिसओन” कर दिया। उन्होंने भावुक संदेश जारी कर माता-पिता से समर्थन मांगा, लेकिन सार्वजनिक रूप से लालू और राबड़ी देवी ने दूरी बनाए रखी। तेजस्वी यादव ने भी कहा कि “पार्टी ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर सकती।”
बिहार की राजनीति पर असर
तेज प्रताप के निष्कासन का सीधा असर हसनपुर विधानसभा सीट पर देखा जा सकता है, जहां से वे विधायक रहे हैं। इस क्षेत्र में उनकी पकड़ मज़बूत थी। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यहां RJD की पकड़ ढीली होगी और NDA को फायदा मिलेगा। यह भी चर्चा है कि तेज प्रताप के व्यक्तिगत समर्थक आगामी चुनावों में समीकरण बदल सकते हैं।
तेज प्रताप की राजनीतिक रणनीति
पार्टी से बाहर होने के बाद तेज प्रताप ने अपनी अलग राह पकड़ ली है। उन्होंने पांच छोटे दलों के साथ मिलकर नया गठबंधन बनाने का ऐलान किया और “जनशक्ति जनता दल” नामक संगठन खड़ा किया। वे भविष्य में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का संकेत भी दे चुके हैं। तेज प्रताप लगातार RJD पर “दोहरी नीति” का आरोप लगाते रहे हैं और कहते हैं कि पार्टी सिर्फ उन्हें निशाना बना रही है।
निष्कर्ष
तेज प्रताप और RJD की दूरी अब सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि वास्तविक लग रही है। पार्टी और परिवार दोनों से अलगाव ने उनकी स्थिति कमजोर की है, लेकिन साथ ही उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बचाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या यह दूरी लंबे समय तक कायम रहेगी या फिर आने वाले चुनावों से पहले कोई नया समीकरण बनेगा। अभी के लिए इतना तय है कि तेज प्रताप का यह अलगाव बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिख रहा है।
Image Captions (AI Prompt)
- लालू प्रसाद यादव के साथ मंच साझा करते हुए तेज प्रताप की पुरानी तस्वीर।
- तेजस्वी यादव और RJD के नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस—तेज प्रताप का जिक्र।
- हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में तेज प्रताप समर्थकों की भीड़।
- नए राजनीतिक मंच पर तेज प्रताप का संबोधन।
Comments
Post a Comment